नाम का पास


फ़िल्म 'गाइड' में नायक राजू को रात में ठंड से ठिठुरता देखकर कोई उसे ज़र्द कपड़ा ओढ़ा जाता है. इसी कपड़े की वजह से गांववाले उसे संत-महात्मा समझ लेते हैं. वह गांववालों को समझाने की बहुत कोशिश करता है कि वह कोई संत या महात्मा नहीं है. लेकिन लोग उसकी एक बात नहीं सुनते. आख़िरकार वह गांववालों के यक़ीन को क़ायम रखने के लिए अपनी जान तक क़ुर्बान कर देता है. असल ज़िन्दगी में ऐसे कितने लोग होंगे, जो अपने नाम और रुतबे का पास रखते होंगे.
-डॉ. फ़िरदौस ख़ान 


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