हमें आंधियों से निस्बत है...


-डॉ. फिरदौस ख़ान  
आंधियों का मौसम शुरू हो चुका है. हमें आंधियां बहुत पसंद हैं. हमें आंधियों से निस्बत है. ये इस बात की अलामत हैं कि हमारा पसंदीदा माह यानी माहे-जून आने वाला है. माहे-जून में गर्मी अपने शबाब पर हुआ करती है. आलम ये कि दिन के पहले पहर से ही लू चलने लगती है. गरम हवाओं की वजह से सड़कें भी सुनसान हो जाती हैं. धूल भरी आंधियां भी ऐसे चलती हैं, मानो सबकुछ उड़ा कर ले जाना चाहती हैं. दहकती दोपहरें भी अलसाई-सी लगती हैं. बचपन में इस मौसम में दिल नहीं लगता था. दादी जान कहा करती थीं कि ये हवायें मन को अपने साथ बहा ले जाती हैं. इसलिए मन उड़ा-उड़ा रहता है. और कहीं भी मन नहीं लगता. तब से दादी जान की बात मान ली कि इस मौसम में ऐसा ही होता है. फिर भी हमें जून बहुत अच्छा लगता है. इस मौसम से मुहब्बत हो गई. दहकती दोपहरें, गरम हवायें, धूल भरी आंधियां. और किसी की राह तकती एक वीरान सड़क. वाक़ई, सबकुछ बहुत अच्छा लगता है. बहुत ही अच्छा. जैसे इस मौसम से जनमों-जनमों का नाता हो. एक ख़ास बात यह है कि जून की शुरुआत ही हमारी सालगिरह यानी एक जून से होती है. अम्मी की सालगिरह भी 27 जून को है, पर एक अगस्त को उनका साथ छूट गया. लेकिन वो हममें हमेशा ज़िन्दा रहेंगी.  और फिर उनकी सालगिरह भी तो इसी माह में है, जिनके क़दमों में हम अपनी अक़ीदत के फूल चढ़ाते हैं.
(ज़िन्दगी की किताब का एक वर्क़)
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निडर पत्रकारिता की मिसाल: 10 मुस्लिम महिला चेहरे


डॉ. फ़िरदौस ख़ान को 'लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी' कहा जाता है। वे एक विद्वान, कवयित्री, कहानीकार, पत्रकार, सम्पादक और अनुवादक हैं जिनका काम आध्यात्मिकता और साहित्य को जोड़ता है।

सूफ़ी परम्परा से जुड़ी फ़िरदौस ने 'फ़हम अल-क़ुरआन' और 'गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' जैसी किताबें लिखी हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी से जुड़ी रहीं फिरदौस ने उर्दू, हिन्दी, पंजाबी और अंग्रेजी में लिखकर सद्भाव और सेवा का संदेश दिया है।

एक झलक देखें  

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बारिश की उदासी...


 
रात से बारिश हो रही है. लड़की को बारिश का मौसम हमेशा से अच्छा लगता है, लेकिन आज न जाने क्यों वह उदास है. कुछ बरस पहले जब जाड़ों के आख़िर में बारिश हुई थी, तब वो साथ था. दोनों साथ-साथ चल रहे थे. आसमान में काली घटा छाई हुई थी, बिल्कुल सावन की तरह. वो बहुत कम बात करते थे, शायद इसलिए कि वो बिना कहे ही एक-दूसरे के दिल की बात जान लिया करते थे. अचानक बारिश होने लगती है. वो भीग जाते हैं. जाड़े में भीगने की वजह से लड़की को बुख़ार आ जाता है. बाद में लड़के का दोस्त बताता है कि लड़का भी बुख़ार से तप रहा है. लड़की सोचती है कि अगर वो उसके पास होती, तो उसे अदरक वाली चाय बनाकर पिलाती. उसके माथे और सीने पर विक्स लगाती, लेकिन वो उसके पास नहीं है.
आज भी बारिश हो रही है. ठंडी हवायें चल रही हैं. लेकिन वो परदेस में है. शायद यही सोचकर लड़की उदास है.
डॉ. फ़िरदौस ख़ान 
Firdaus Diary
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