कितनी प्यारी दुआ है
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कितनी प्यारी दुआ है-
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيم
إلهي كفى بي عِزًّا أن أكون لك عَبدًا، وكفى بي فخرًا أن تكون لي رَبًّا، أنت
كما أُحب فاجعلني كما...
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4 अप्रैल 2015 को 10:16 am बजे
कविता ने मन को बाँध लिया .. क्या खूब लिखा है .. अंतिम पंक्तियों ने जादू कर दिया है :)
क्यूंकि
मेरे लिए तू ही काफ़ी है
अल्लाह तू ही तू...
4 अप्रैल 2015 को 7:24 pm बजे
बहुत खूब!