कलमा...


मेरे मौला !
मेरे मौला !
पहले भी ज़ुबां पर
उनका नाम रहता था...
मगर
अब भी शामो-सहर ज़ुबां पर
कलमे की तरह
उनका नाम ही रहता है...
वो इश्क़े-मजाज़ी था
और
ये इश्क़े-हक़ीक़ी है…
-फ़िरदौस ख़ान 
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6 Response to "कलमा... "

  1. ajit nehra says:
    5 फ़रवरी 2015 को 7:57 am बजे

    bhut accha likhte ho g if u wana start a best blog site than visit us
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  2. यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) says:
    8 फ़रवरी 2015 को 10:55 am बजे

    आज 08/ फरवरी /2015 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

  3. दिगम्बर नासवा says:
    8 फ़रवरी 2015 को 3:21 pm बजे

    क्या बात ... बहुत उम्दा कलाम ...

  4. nadeem says:
    17 मार्च 2015 को 11:51 am बजे

    Waah!!! Bahut Khoob..

  5. Unknown says:
    18 मार्च 2015 को 4:57 pm बजे

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  6. Ahir says:
    1 अप्रैल 2015 को 12:42 am बजे

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