मुतमईनी

ज़िन्दगी में इंसान को आख़िर क्या चाहिए... वो सुकून ही तो है, जिसके लिए इंसान उम्रभर भटकता रहता है... और सुकून हासिल होता है मुतमईनी से, तस्कीन से...
मिसाल के तौर पर एक शख़्स चपरासी बनकर भी ख़ुश हो जाता है और इसे अपनी बड़ी कामयाबी मानकर तस्कीन से ज़िन्दगी बसर करता है...
एक शख़्स प्रधानमंत्री बनकर भी ख़ुश नहीं हो पाता और किसी सराब के पीछे भटकता फिरता है...
ज़िन्दगी में मुतमईनी बड़ी चीज़ है...
(Firdaus Diary)
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