मेरे महबूब !
सोचती हूं
तुम्हारे सदक़े में
किसी साइल को
क्या दूं...
अगर मेरे हिस्से में जन्नत हो
तो वो उसके कांसे में डाल दूं...
और
तुम्हारी जान के सदक़े में
अपनी जान निसार कर दूं... -फ़िरदौस ख़ान
When I am unwell
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When I am unwell—my body drained by fever and the very act of resting
becoming wearisome—everything outside my room suddenly seems so appealing.
I long t...
हमारी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधना...
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जल, झरनों की झर-झर, हवा की सांय-सांय और रिमझिम बूंदों की टिप-टिप. सभी में
सं...
ऐ इत्मीनान पाने वाली जान
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मौत जब भी आए, तो अपनों के बीच चहारदीवारी में आए. और रूह क़ब्ज़ करने वाला
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ऐ इत्मीनान पाने वाली जान !
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Dr. Firdaus Khan
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Dr Firdaus Khan is an Islamic scholar, poetess, author, script writer,
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27 सूरह अन नम्ल
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सूरह अन नम्ल मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 93 आयतें हैं.
*अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है*1. ता सीन. ये
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फ़िरदौस ख़ान
इस बलॊग में ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं
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