हमारी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधना...
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संगीत प्रकृति के कण-कण में बसा है. चिड़ियों की चहचहाहट, नदियों का कल-कल करता
जल, झरनों की झर-झर, हवा की सांय-सांय और रिमझिम बूंदों की टिप-टिप. सभी में
सं...
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3 मार्च 2016 को 12:40 am बजे
बहुत सच है कभी कभी अजनबी जाने पहचाने लगते है .