इशराक़ की नमाज़
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इशराक़ की नमाज़ हज और उमरा का सवाब
हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल हज़रत
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया-" ...
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4 अप्रैल 2015 को 10:16 am बजे
कविता ने मन को बाँध लिया .. क्या खूब लिखा है .. अंतिम पंक्तियों ने जादू कर दिया है :)
क्यूंकि
मेरे लिए तू ही काफ़ी है
अल्लाह तू ही तू...
4 अप्रैल 2015 को 7:24 pm बजे
बहुत खूब!