नमाज़ की फ़ज़ीलत
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अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- " जो शख़्स
इस हालत में अल्लाह से मुलाक़ात करे कि वह पाँचों नमाज़ें अदा करता था, तो
उसे बख़्...
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4 अप्रैल 2015 को 10:16 am बजे
कविता ने मन को बाँध लिया .. क्या खूब लिखा है .. अंतिम पंक्तियों ने जादू कर दिया है :)
क्यूंकि
मेरे लिए तू ही काफ़ी है
अल्लाह तू ही तू...
4 अप्रैल 2015 को 7:24 pm बजे
बहुत खूब!