ऐ इत्मीनान पाने वाली जान
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मौत जब भी आए, तो अपनों के बीच चहारदीवारी में आए. और रूह क़ब्ज़ करने वाला
फ़रिश्ता ये पैग़ाम लेकर आए-
ऐ इत्मीनान पाने वाली जान !
तू अपने परवरदिगार की तरफ़ इस ...
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2 अप्रैल 2015 को 6:46 pm बजे
खुशनुमा पल कब पूनम के चाँद की तरह गुम हो जाय कुछ नहीं कह सकते ...बहुत सुन्दर रचना