हमारी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधना...
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संगीत प्रकृति के कण-कण में बसा है. चिड़ियों की चहचहाहट, नदियों का कल-कल करता
जल, झरनों की झर-झर, हवा की सांय-सांय और रिमझिम बूंदों की टिप-टिप. सभी में
सं...
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12 जुलाई 2014 को 4:32 pm बजे
वाह
बहुत सुन्दर बात ..कितना कुछ कह दिया इन साधारण से शब्दों में..
बहुत बढ़िया.