ज़िक्रे इलाही की फ़ज़ीलत
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*डॉ. फ़िरदौस ख़ान *इंसान सुकून की तलाश में न जाने कहां-कहां भटकता है, लेकिन
सुकून उसे सिर्फ़ अल्लाह की पनाह में ही मिलता है. अल्लाह के ज़िक्र से मिलता
है. ...
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10 मार्च 2010 को 5:37 pm बजे
क्या ख़ूब कहा है...
तअरुफ़ : मेरा महबूब
मोहतरमा बेनज़ीर हैं, लाजवाब हैं...
आपकी तारीफ़ के लिए अल्फ़ाज़ की कमी हम शिद्दत से महसूस कर रहे हैं...
10 मार्च 2010 को 6:12 pm बजे
बहुत खूब, लाजबाब !
10 मार्च 2010 को 6:41 pm बजे
प्रस्तुति अंदाज पसंद आया ....
10 मार्च 2010 को 9:32 pm बजे
गुलज़ार और जावेद अख्तर सी ज़बान माशा-अल्लाह!!