हमारी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधना...
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संगीत प्रकृति के कण-कण में बसा है. चिड़ियों की चहचहाहट, नदियों का कल-कल करता
जल, झरनों की झर-झर, हवा की सांय-सांय और रिमझिम बूंदों की टिप-टिप. सभी में
सं...
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10 मार्च 2010 को 5:37 pm बजे
क्या ख़ूब कहा है...
तअरुफ़ : मेरा महबूब
मोहतरमा बेनज़ीर हैं, लाजवाब हैं...
आपकी तारीफ़ के लिए अल्फ़ाज़ की कमी हम शिद्दत से महसूस कर रहे हैं...
10 मार्च 2010 को 6:12 pm बजे
बहुत खूब, लाजबाब !
10 मार्च 2010 को 6:41 pm बजे
प्रस्तुति अंदाज पसंद आया ....
10 मार्च 2010 को 9:32 pm बजे
गुलज़ार और जावेद अख्तर सी ज़बान माशा-अल्लाह!!