बेर के दरख़्त के अनोखे राज़
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*डॉ. फ़िरदौस ख़ान *
बेर का दरख़्त सिर्फ़ फल का एक दरख़्त ही नहीं है, बल्कि इसमें बहुत से राज़
पोशीदा हैं. क़ुरआन करीम और मुख़का दरख़्त सिर्फ़ फल का दरख़्त ही नहीं है...
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8 जनवरी 2010 को 2:36 pm बजे
प्यार के गहरे जज्बात
8 जनवरी 2010 को 2:57 pm बजे
लाजवाब कर दिया आपने।
आपकी सोच को सलाम करता हूँ।
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बारिश की वो सोंधी खुश्बू क्या कहती है?
क्या सुरक्षा के लिए इज्जत को तार तार करना जरूरी है?
8 जनवरी 2010 को 10:17 pm बजे
फिरदौस साहिबा,
बस यूं समझिये,
नज्म का सारा दारोमदार
'इश्क के घूंट' पर ही टिका है
इस अंदाज़ में किसी के हो जाने के भाव को
बिल्कुल नये शब्द मिले हैं
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
8 फ़रवरी 2010 को 4:57 pm बजे
जिसके लिए लोगों ने इतना कुछ लिख/कह डाला उसे काफी के एक घूंट समाहित कर दिया - वाह-वाह लाजवाब - आपकी लेखनी सलामत रहे और यूँ ही चलती रहे - - हार्दिक शुभकामनाएं
6 मार्च 2010 को 8:58 pm बजे
इश्क़ का घूंट.......सुब्हानअल्लाह.......आपने तो इन तीन अल्फ़ाज़ में ही सब कुछ कह दिया.......लाजवाब कर दिया.......