मौसम


मेरे महबूब! 
कितने मौसम आए
और
आकर गुज़र गए
लेकिन 
मैं आज भी 
उम्र की तपती दोपहरी में
खडी़ हूं
तुम्हारे इंतज़ार में... 
-डॉ. फ़िरदौस ख़ान

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