नमाज़ की फ़ज़ीलत
-
अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- " जो शख़्स
इस हालत में अल्लाह से मुलाक़ात करे कि वह पाँचों नमाज़ें अदा करता था, तो
उसे बख़्...
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)









20 दिसंबर 2009 को 12:35 am बजे
कोमल भावों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति। -
http://drashokpriyaranjan.blogspot.com
http://www.ashokvichar.blogspot.com
20 दिसंबर 2009 को 12:36 am बजे
वाह बहुत सुंदर बात
20 दिसंबर 2009 को 1:32 am बजे
फिरदौस साहिबा,
'इंसान जितना.....यही ज़िंदगी है
ऐसा क्यूं सोचती हैं आप?
जिगर साहब का एक शेर समाअत फरमायें-
चला जाता हूं हंसता खेलता दौरे-हवादिस से
अगर आसानियां हों, ज़िंदगी दुश्वार हो जाये...
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
20 दिसंबर 2009 को 8:05 am बजे
उलझन जीवन की सखा कभी न छूटे साथ।
खुशियाँ मिलतीं हैं तभी मिले हाथ से हाथ।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
20 दिसंबर 2009 को 12:16 pm बजे
सही बात कही आपने शुभकामनायें