गुलमोहर के दहकते फूल

सुलगती दोपहरी में
खिड़की से झांकते
गुलमोहर के
दहकते फूल
कितने अपने से
लगते हैं...
बिल्कुल
हथेलियों पर लिखे
'नाम' की तरह...
-फ़िरदौस ख़ान
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10 Response to "गुलमोहर के दहकते फूल"

  1. संजय भास्कर says:
    13 मार्च 2010 को 5:02 pm

    बहुत खूब, लाजबाब !

  2. वन्दना says:
    13 मार्च 2010 को 5:22 pm

    bahut hi marmsparshi.

  3. Mithilesh dubey says:
    13 मार्च 2010 को 5:59 pm

    बहुत ही खूबसूरत ।

  4. M VERMA says:
    13 मार्च 2010 को 6:02 pm

    हथेलियों पर लिखे नाम नहीं दहकते
    दिल में उठते अरमान दहकते हैं

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति चन्द पंक्तियों में
    बेहतरीन

  5. अजय कुमार झा says:
    13 मार्च 2010 को 6:21 pm

    वाह गुलमोहर फ़ूलों का तो कहना ही क्या बिल्कुल हथेली पर लिखे नाम की तरह ..सचमुच ..
    अजय कुमार झा

  6. Amitraghat says:
    13 मार्च 2010 को 7:24 pm

    गुलमोहर की तरह सुन्दर........."
    amitraghat.blogspot.com

  7. sanjeev kuralia says:
    14 मार्च 2010 को 12:49 am

    बहुत खूबसूरत ख्याल .......!

  8. विनोद कुमार पांडेय says:
    14 मार्च 2010 को 8:48 am

    सुंदर अभिव्यक्ति....बधाई

  9. कृष्ण मुरारी प्रसाद says:
    14 मार्च 2010 को 11:54 am

    छोटी सी प्यारी सी....सुन्दर प्रस्तुति
    ..........
    जब लहराती है बीबी अपने काले केश,
    और गुनगुनाती है मीठे गीत,
    तो मन करता है,
    फूल बनकर लग जाऊं उसकी चोटी में,
    और झूलने लगूं झूला, गजरा बनकर.
    लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से
    http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_3507.html

  10. शहरोज़ says:
    15 मार्च 2010 को 12:15 pm

    bahut hi pyaari nazm!!

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