मेरा महबूब

नाम : बहारों का मौसम
तअरुफ़ : मेरा महबूब
ज़बान : शहद से शीरी
लहजा : झड़ते फूल
पता : फूलों की वादियां
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6 Response to "मेरा महबूब"

  1. मौसम says:
    10 मार्च 2010 को 5:37 pm

    क्या ख़ूब कहा है...
    तअरुफ़ : मेरा महबूब

    मोहतरमा बेनज़ीर हैं, लाजवाब हैं...
    आपकी तारीफ़ के लिए अल्फ़ाज़ की कमी हम शिद्दत से महसूस कर रहे हैं...

  2. Mithilesh dubey says:
    10 मार्च 2010 को 6:02 pm

    बहुत खूब ।

  3. संजय भास्कर says:
    10 मार्च 2010 को 6:12 pm

    बहुत खूब, लाजबाब !

  4. Suman says:
    10 मार्च 2010 को 6:14 pm

    nice

  5. महेन्द्र मिश्र says:
    10 मार्च 2010 को 6:41 pm

    प्रस्तुति अंदाज पसंद आया ....

  6. शहरोज़ says:
    10 मार्च 2010 को 9:32 pm

    गुलज़ार और जावेद अख्तर सी ज़बान माशा-अल्लाह!!

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