तन्हाई का मौसम...

जब
ज़िन्दगी की वादियों में
तन्हाई का मौसम हो
और
अरमान
पलाश से दहकते हों...
तब
निगाहें
तुम्हें तलाशती हैं...
और
हर सांस
तुमसे मिलने की दुआ करती है
-फ़िरदौस ख़ान
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17 Response to "तन्हाई का मौसम..."

  1. Udan Tashtari says:
    9 मार्च 2010 को 9:42 am

    वाह! उम्दा!

  2. RaniVishal says:
    9 मार्च 2010 को 9:51 am

    Sundar Abhivyakti....Shubhkaamnaae!!
    Happy Women's Day !!

  3. भारतीय नागरिक - Indian Citizen says:
    9 मार्च 2010 को 9:53 am

    बहुत खूब!

  4. संजय भास्कर says:
    9 मार्च 2010 को 9:54 am

    बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

  5. संजय भास्कर says:
    9 मार्च 2010 को 9:54 am

    lajwaab parstuti....

  6. शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' says:
    9 मार्च 2010 को 10:05 am

    निगाहें तुम्हें तलाशती हैं....
    जबकि दिल जानता है....
    तुम कभी नहीं आओगे....
    ......वही आपके खास अंदाज़ में पेश की गई नज़्म

    बस कुछ ऐसा ही होता है---
    कोई वादा नहीं किया तुमने,
    फिर भी रहता है इंतज़ार मगर.....

  7. निर्मला कपिला says:
    9 मार्च 2010 को 10:28 am

    सुन्दर अभिव्यक्ति शुभकामनायें

  8. महफूज़ अली says:
    9 मार्च 2010 को 11:17 am

    आज बहुत दुखी हूँ.... इस आभासी दुनिया में कभी रिश्ते नहीं बनाने चाहिए... कई रिश्ते दर्द देते हैं.... बहुत दर्द देते हैं... ऐसा दर्द जो नासूर बन जाता है...

  9. सलीम ख़ान says:
    9 मार्च 2010 को 11:19 am

    बहन फ़िरदौस,

    बहुत बहुत बहुत खूबसूरत और दिल को छू देने वाली छोटी मगर बेहद सशक्त रचना !!!

    आपका भाई
    सलीम ख़ान

  10. वन्दना says:
    9 मार्च 2010 को 12:57 pm

    bahut hi vedna bhari abhivyakti.

  11. दिगम्बर नासवा says:
    9 मार्च 2010 को 1:16 pm

    इंतेज़ार की इंतेहा है ये .... बहुत खूब लिखा है ....

  12. शहरोज़ says:
    9 मार्च 2010 को 9:08 pm

    बहुत ही खूबसूरत कविता.बेहद मार्मिक!

  13. मौसम says:
    10 मार्च 2010 को 5:41 pm

    जब
    ज़िन्दगी की वादियों में
    तन्हाई का मौसम हो
    और
    अरमान
    पलाश से दहकते हों...

    तब
    निगाहें
    तुम्हें तलाशती हैं...

    जबकि
    दिल जानता है
    तुम कभी नहीं आओगे...



    दर्द की इंतिहा है....... मगर फिर भी मुहब्बत है.......

  14. anitakumar says:
    13 मार्च 2010 को 11:49 pm

    बहुत खूब कहा

  15. एम के मिश्र says:
    17 मार्च 2010 को 4:24 pm

    आह!

  16. एम के मिश्र says:
    17 मार्च 2010 को 4:24 pm

    आह!

  17. एम के मिश्र says:
    17 मार्च 2010 को 4:24 pm

    आह!

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