फ़िरदौस ख़ान : लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी
-
फ़िरदौस ख़ान को लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी के नाम से जाना जाता है. वे शायरा,
लेखिका और पत्रकार हैं. वे एक आलिमा भी हैं. वे रूहानियत में यक़ीन रखती हैं और
सू...
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
24 दिसंबर 2009 को 8:21 pm बजे
बहुत सुंदर लफ़्ज़ों के साथ.... बहुत सुंदर rachna.....
24 दिसंबर 2009 को 9:51 pm बजे
बहुत सुन्दर!!कहीं बहुत गहरे से निकले शब्द....
24 दिसंबर 2009 को 11:20 pm बजे
सुदंर लाईने हैं, आभार, और ईमान मलेकि की पेंटिंग साथ में लगाकर आपने मजा दुगना कर दिया
25 दिसंबर 2009 को 1:35 am बजे
'दिल ने एक सजदा... तुम्हे भी किया है...
और तभी से.. मेरी रूह सजदे में है'
आपके
इस अंदाजे-बयां पर क्या कहा जाये?
हां, अपना एक शेर याद आ रहा है-
मांगता रहता हूं इक बुत को खुदा से अकसर
इश्क ने कैसा 'मुसलमान' बना रखा है???
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
26 दिसंबर 2009 को 8:06 pm बजे
kya baat hai
bahut sundar
gahre bhaav
shubh kaamnayen
6 मार्च 2010 को 9:04 pm बजे
दिल ने
एक सजदा
तुम्हें भी किया है
और तभी से
मेरी रूह सजदे में है...
सुब्हानअल्लाह.......पाकीज़गी, इबादत और मुहब्बत की इंतिहा.......
3 अप्रैल 2010 को 8:45 pm बजे
Is zameen se falak tak
shayad do hi ghazab ki hain...........
Ek to aapka likhna...
aur ek mera parhna....