उनकी आंखें...


कुछ लोग ज़िन्दगी का हासिल हुआ करते हैं... वो भी हमारे ज़िन्दगी का हासिल हैं... उनकी तस्वीर हमेशा हमारी डायरी में रहती है... जब भी मन उदास होता है...हम उस तस्वीर को देखते रहते हैं... घंटों ऐसे ही बीत जाते हैं, पता नहीं चलता कि कब दोपहर से शाम हुई और कब रात से सुबह हो गई. अपनी पूरी उम्र उस तस्वीर को देखते रह सकते हैं...
कितनी सच्ची हैं उनकी आंखें... कितनी मुहब्बत है उन आंखों में... पापा की आंखों में भी बहुत मुहब्बत थी... जब भी कोई दिल दुखाता है, तो दिल चाहता है कि पापा की गोद में सर रख कर बहुत रोयें... पर हम ऐसा नहीं कर सकते... क्योंकि पापा तो क़ब्र में सो रहे हैं... काश ! हम भी पापा की क़ब्र में जाकर उनके सीने पर सर रख कर कुछ देर सुकून से सो सकते... जिस तरह बचपन में सोया करते थे...
पापा के जाने के बाद उनकी आंखों में वो मुहब्बत देखी,  जिसके आगे दोनों जहां की हर शय छोटी मालूम होती है... इसलिए उनके साये में हमारी रूह सुकून पाती है...
कितनी प्यारी हैं उनकी आंखें... न जाने कौन-सा सहर है इनमें, कोई एक बार देखे, तो बस इन्हीं का ही होकर रह जाता है... कितनी गहरी हैं ये आंखें... शायद समन्दर से भी ज़्यादा गहरी... जो एक बार इनमें डूबा, तो फिर कभी बाहर नहीं आया... 


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