रोज़ेदार


फ़िरदौस खान
अमूमन तीन तरह के रोज़ेदार हुआ करते हैं... पहली तरह के रोज़ेदारों के पास एसी हैं... ये लोग सहरी करते हैं. फ़ज्र की नमाज़ पढ़कर एसी रूम में सो जाते हैं और तीन-चार बजे उठते हैं. ज़ुहर पढ़ते हैं, असर पढ़ते हैं और फिर इफ़्तारी की तैयारी में लग जाते हैं... इनके पास इफ़्तारी में दुनिया की हर शय होती है...

दूसरी तरह के रोज़ेदारों के पास एसी तो दूर कूलर तक नहीं हैं... ये लोग रोज़े की हालत में सुबह से शाम तक काम करते हैं और शाम को थोड़ा-बहुत इफ़्तारी और सहरी का सामान लेकर घर आते हैं... इनकी औरतें रोज़े की हालत में गर्मी से बचने के लिए पानी में भीगे दुपट्टे लपेटती हैं...

तीसरी तरह के रोज़ेदारों के पास पंखे तक नहीं है... ये लोग दिनभर मेहनत करते हैं, जब कहीं जाकर इनके घरों में चूल्हे जलते हैं... इन्हें सहरी और इफ़्तारी में रोटी भी मिल जाए, तो ग़नीमत है...

अल्लाह सबके रोज़े क़ुबूल फ़रमाए, आमीन

तस्वीर गूगल से साभार
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1 Response to "रोज़ेदार"

  1. Satish Saxena says:
    27 जून 2015 को 5:14 pm

    आमीन !

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