सिल-बट्टे...


बाज़ार में तरह-तरह की नामी कंपनियों के tomato ketchup और saus मिल जाएंगे... लेकिन जो ज़ायक़ा घरों में सिल-बट्टे पर बनने वाली टमाटर, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और हरे धनिये की चटनियों में है, वह कहीं और नहीं मिलेगा...
हालांकि अब घर-घर grinder mixer आ गए हैं... बाज़ार में भी हल्दी, मिर्च, धनिया से लेकर गरम मसाले तक पिसे हुए मिलने लगे हैं... लेकिन आज भी ऐसे घरों की कमी नहीं, जहां सभी मसाले सिल-बट्टे पर पीसे जाते हैं... हमारी नानी जान भी हमेशा सिल-बट्टे पर ही मसाला पीसा करती थीं... उनका कहना था कि खाने में जो ज़ायक़ा और ख़ुशबू सिल-बट्टे पर पिसे मसालों से आता है, वह grinder mixer में पिसे मसालों से नहीं आ पाता... हमारी एक मामी और उनकी बेटियां भी हमेशा सिल-बट्टे पर ही मसाला पीसती हैं... हालांकि इसमें मेहनत ज़्यादा है और वक़्त भी काफ़ी लग जाता है... लेकिन जिन्हें सिल-बट्टे के मसालों का ज़ायक़ा लग जाए, फिर कहां छूटता है...  हमारे घर में भी सिल-बट्टे वाली चटनी ही पसंद की जाती है... नोएडा में सिल-बट्टा ख़रीदने के लिए हमें बहुत घूमना पड़ा था... पुरानी दिल्ली में तो बहुत आसानी से मिल जाते हैं...

सिल- बट्टे को सही रखने के लिए इसे छेनी हथौड़ी से तराशा जाता है... गांव-क़स्बों में यह काम करने वाले गली-मुहल्लों में आवाज़ लगाते मिल ही जाते हैं... मगर बाज़ार मे मिलने वाले पिसे मसालों और grinder mixer की वजह से इन लोगों काम ख़त्म होता जा रहा है...

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