नज़्म


किताबें
तस्वीरें और ख़त
यादों का ज़ख़ीरा ही तो हैं
जिस पर
हमेशा के लिए
बस जाने को
ये दिल चाहता है...
-फ़िरदौस ख़ान

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5 Response to "नज़्म"

  1. राजेंद्र कुमार says:
    24 अक्तूबर 2013 को 10:05 am

    आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (25-10-2013) को " ऐसे ही रहना तुम (चर्चा -1409)" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

  2. रश्मि शर्मा says:
    25 अक्तूबर 2013 को 10:47 am

    बि‍ल्‍कुल सही

  3. Pratibha Verma says:
    25 अक्तूबर 2013 को 11:18 am

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

  4. आशा जोगळेकर says:
    26 अक्तूबर 2013 को 2:33 am

    सही कहा किताबें, उनमें दबे कत और तस्वीरें यादों के कितने गलियारे घुमवाती हैं.

  5. आशा जोगळेकर says:
    26 अक्तूबर 2013 को 2:36 am

    सही कहा खत किताबें तस्वीरें यादों के कितने गलियारे घुमवाती हैं।

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