रमज़ान और ग़रीबों का हक़
-
रमज़ान आ रहा है... जो साहिबे-हैसियत हैं, रमज़ान में उनके घरों में लंबे-चौड़े
दस्तरख़्वान लगते हैं... इफ़्तार और सहरी में लज़ीज़ चीज़ें हुआ करती हैं, लेकिन जो
ग़र...
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)











25 अक्टूबर 2013 को 10:47 am बजे
बिल्कुल सही
25 अक्टूबर 2013 को 11:18 am बजे
बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।
26 अक्टूबर 2013 को 2:33 am बजे
सही कहा किताबें, उनमें दबे कत और तस्वीरें यादों के कितने गलियारे घुमवाती हैं.
26 अक्टूबर 2013 को 2:36 am बजे
सही कहा खत किताबें तस्वीरें यादों के कितने गलियारे घुमवाती हैं।