प्रबंधन पर आधारित काव्य संग्रह


फ़िरदौस ख़ान
पाखी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित चंद्रसैन प्रबल की पुस्तक प्रबंध चेतना अपने आप में अनूठी है, क्योंकि रचनाकार ने एक प्रबंधक के नज़रिए से कविताएं रची हैं. किताब की शुरुआत मंत्रों से की गई है. इसके बाद गणेश और विद्या की देवी सरस्वती की आरती है. फिर कवि ने कविता के माध्यम से अपना परिचय दिया है. अब बारी आती है कविताओं की. कवि ने युवा निर्माण, परिवर्तन, व्यक्तित्व निर्माण, मानवीय प्रवृत्ति, व्यापार, लूटपाट, संघर्ष, देश, बिजनेस प्लानिंग, चिंता और ज़िम्मेदारी, वर्तमान परिस्थितियों, भ्रष्टाचार, प्रबंधन, टाइम मैनेजमेंट, प्रोडक्ट्‌स के स्टैंडर्ड, प्रबंधन नीति, रिश्तों, मनोबल, शेयर बाज़ार, स्कीमों की ज़रूरत, ग्राहक का तुष्टिकरण, प्रबंधन के फैक्टर्स, वाइटल फैक्टर, प्रबंधन स्ट्रैटेजी, करियर, लक्ष्य, नौकरशाहों की कारगुज़ारी आदि विषयों पर कविताएं लिखी हैं. जीवन में कामयाबी के लिए अनुशासन बहुत ज़रूरी है और बच्चों को यह गुण अपनी मां से मिलता है. वे लिखते हैं-
मां द्वारा सख़्ती करने से बच्चे अनुशासित बनते हैं
अनुशासित बच्चे जीवन में, बहुत तरक़्क़ी करते हैं
मां ममता की मूरत होती है, जो लाड़ बहुत दिखलाती है
पिता के सख़्ती करने पर, वो बच्चों को समझाती है

महिला आज जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं. लिखते हैं-
जिनको पर्दे में रखते थे, आज बराबर चलती हैं
जिनको न कभी तरजीह मिली, वो आज चमत्कार करती हैं

आज जब देश में हर तरफ़ भ्रष्टाचार का बोलबाला है, ऐसे में देशप्रेम की भावना ही देश को बचा सकती है. तभी तो कवि ने कहा है-
दुष्ट लोग कितने की बढ़ जाएं, अपने प्यारे देश में
देशभक्त भी सदा रहेंगे, बलिदानी के वेश में
भारत मां की जय बोलो, भारत मां की जय
भारत मां की जय बोलो, भारत मां की जय

कवि का कहना है कि प्रबंधन की भाषा में विचारों को मन में रोकना, उचित माध्यम इस्तेमाल न कर पाना, सही लोगों या प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने में असमर्थ होना, अथवा उनको आगे और बेहतर बनाने की कोशिश ही न करना भी हमारे प्यारे देश, संस्थान व युवाओं के विकास में न केवल रुकावट है, बल्कि प्रेरणादायी स्रोतों की कमी बनाए रखकर भारी भूल का परिचय देना है. इस पुस्तक को काव्य शास्त्र की दृष्टि से न देखकर, रचनाकार के विचारों को सराहा जा सकता है. कवि ने स्वयं स्वीकार किया है कि विज्ञान का छात्र एवं डेरी टेक्नोक्रेट होने के कारण भाषा शैली और छंद शास्त्र में उनकी पकड़ कम है, लेकिन उन्होंने मां सरस्वती की कृपा से इन रचनाओं का सृजन अंतत: भलीभांति संपन्न कर ही लिया है. बहरहाल, 128 पृष्ठ वाली इस पेपरबैक्स पुस्तक की क़ीमत298 रुपये है, जो कि लगता है कि पाठकों के लिए कुछ ज़्यादा है. (स्टार न्यूज़ एजेंसी)

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1 Response to "प्रबंधन पर आधारित काव्य संग्रह"

  1. vandana gupta says:
    2 नवंबर 2013 को 1:17 pm

    सुन्दर प्रस्तुति………

    काश
    जला पाती एक दीप ऐसा
    जो सबका विवेक हो जाता रौशन
    और
    सार्थकता पा जाता दीपोत्सव

    दीपपर्व सभी के लिये मंगलमय हो ……

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