गुलाब-सी महकी यादें




चंद यादें
ज़िन्दगी के आंगन में
खिले सुर्ख़ गुलाबों की तरह
होती हैं
जिनकी भीनी-भीनी ख़ुशबू
मुस्तक़बिल तक को महका देती है...
-फ़िरदौस ख़ान
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7 Response to "गुलाब-सी महकी यादें"

  1. मौसम says:
    25 सितंबर 2008 को 9:10 am

    चंद यादें
    ज़िन्दगी के आंगन में
    खिले सुर्ख़ गुलाबों की तरह
    होती हैं
    जिनकी भीनी-भीनी खुशबू
    मुस्तक़बिल तक को महका देती है...

    सुब्हान अल्लाह दिल को छू लेने वाली नज़्म है...आप में ग़ज़ब की क़ाबिलियत है...

  2. Advocate Rashmi saurana says:
    25 सितंबर 2008 को 11:46 am

    kya baat hai. bhut sundar.
    Firdaus ji raziya sultan ke gaane me pahale hi apni post me daal chuki hu. uske link
    http://thodasasukun.blogspot.com/2008/07/blog-post_09.html
    http://thodasasukun.blogspot.com/2008/07/blog-post_3427.html
    http://thodasasukun.blogspot.com/2008/07/blog-post_1394.html
    ye tin gaane raziya sultan ke hai.

  3. manvinder bhimber says:
    25 सितंबर 2008 को 12:13 pm

    चंद यादें

    ज़िन्दगी के आंगन में
    खिले सुर्ख़ गुलाबों की तरह
    होती हैं
    bahut sunder....dil ko chu gai hai aapki je paktiyan

  4. Parul says:
    25 सितंबर 2008 को 1:09 pm

    जिनकी भीनी-भीनी खुशबू
    मुस्तक़बिल तक को महका देती है...
    sacchhi!!!

  5. ज़ाकिर हुसैन says:
    25 सितंबर 2008 को 1:12 pm

    अच्छी लाइने!!!!!
    ख़ूबसूरत भाव !!!!

  6. PREETI BARTHWAL says:
    25 सितंबर 2008 को 6:08 pm

    क्या बात है बहुत खूब फिरदौस जी

  7. dr. ashok priyaranjan says:
    27 सितंबर 2008 को 1:41 am

    vakai yadon ki khushboo puri jindagi dil aur dimag per chayi rahti hai.

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