फ़िरदौस ख़ान : लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी
-
फ़िरदौस ख़ान को लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी के नाम से जाना जाता है. वे शायरा,
लेखिका और पत्रकार हैं. वे एक आलिमा भी हैं. वे रूहानियत में यक़ीन रखती हैं और
सू...
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
25 सितंबर 2008 को 9:10 am बजे
चंद यादें
ज़िन्दगी के आंगन में
खिले सुर्ख़ गुलाबों की तरह
होती हैं
जिनकी भीनी-भीनी खुशबू
मुस्तक़बिल तक को महका देती है...
सुब्हान अल्लाह दिल को छू लेने वाली नज़्म है...आप में ग़ज़ब की क़ाबिलियत है...
25 सितंबर 2008 को 11:46 am बजे
kya baat hai. bhut sundar.
Firdaus ji raziya sultan ke gaane me pahale hi apni post me daal chuki hu. uske link
http://thodasasukun.blogspot.com/2008/07/blog-post_09.html
http://thodasasukun.blogspot.com/2008/07/blog-post_3427.html
http://thodasasukun.blogspot.com/2008/07/blog-post_1394.html
ye tin gaane raziya sultan ke hai.
25 सितंबर 2008 को 12:13 pm बजे
चंद यादें
ज़िन्दगी के आंगन में
खिले सुर्ख़ गुलाबों की तरह
होती हैं
bahut sunder....dil ko chu gai hai aapki je paktiyan
25 सितंबर 2008 को 1:09 pm बजे
जिनकी भीनी-भीनी खुशबू
मुस्तक़बिल तक को महका देती है...
sacchhi!!!
25 सितंबर 2008 को 1:12 pm बजे
अच्छी लाइने!!!!!
ख़ूबसूरत भाव !!!!
25 सितंबर 2008 को 6:08 pm बजे
क्या बात है बहुत खूब फिरदौस जी
27 सितंबर 2008 को 1:41 am बजे
vakai yadon ki khushboo puri jindagi dil aur dimag per chayi rahti hai.