बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो, इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें...


नगमें रफ़ाक़तों के सुनाती हैं बारिशें
अरमान ख़ूब दिल में जगाती हैं बारिशें

बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें

मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें

ख़ामोश घर की छत की मुंडेरों पे बैठकर
परदेसियों को आस बंधाती हैं बारिशें

जैसे बगैर रात के होती नहीं सहर
यूं साथ बादलों का निभाती हैं बारिशें

सहरा में खिल उठे कई महके हुए चमन
बंजर ज़मीं में फूल खिलाती हैं बारिशें

'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
आ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें
-फ़िरदौस ख़ान
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12 Response to "बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो, इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें..."

  1. अमिताभ मीत says:
    16 अगस्त 2009 को 10:49 am

    मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
    रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें

    बहतरीन ग़ज़ल. क्या बात है.

  2. परमजीत बाली says:
    16 अगस्त 2009 को 1:26 pm

    बहुत उम्दा गज़ल है!!

    ख़ामोश घर की छत की मुंडेरों पे बैठकर
    परदेसियों को आस बंधाती हैं बारिशें

  3. ओम आर्य says:
    16 अगस्त 2009 को 2:43 pm

    bahut hi sundar rachana

  4. समयचक्र : महेन्द्र मिश्र says:
    16 अगस्त 2009 को 2:54 pm

    उम्दा गज़ल

  5. mehek says:
    16 अगस्त 2009 को 7:16 pm

    बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
    इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें

    मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
    रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें
    waah baarish ki tarah hi khubsurat nazm,har alfaz ek naya jazbaat liye,lajawab

  6. anoop says:
    17 अगस्त 2009 को 6:01 pm

    मगर कभी कभी बारिश इतनी देर से होती है कि उसके इन्तिज़ार में गुल ही नहीं बल्कि शाख या कि दरख्त तक सूख जाता है. उस दरख्त को उस आसमानी बारिश कि दरकार नहीं होती बल्कि उसके किसी अपने के दीदा-ए-तर से गिरा हुआ एक गौहर उसको ज़िन्दगी बख्श देता है.

  7. मौसम says:
    24 अगस्त 2009 को 11:14 am

    बहुत ही शानदार ग़ज़ल है...

    आज बहुत खुशगवार मौसम है...बिलकुल चम्पई उजाले और सुरमई अंधेरे वाला दिन...आसमान पर छाई काली घनघोर घटाएं...माहौल को रूमानी बना रही हैं...


    नगमें रफ़ाक़तों के सुनाती हैं बारिशें
    अरमान ख़ूब दिल में जगाती हैं बारिशें

    बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
    इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें

  8. Yusuf Kirmani says:
    25 अगस्त 2009 को 10:43 pm

    वाकई शानदार है।

  9. विनय ‘नज़र’ says:
    1 सितंबर 2009 को 11:40 am

    बहुत ख़ूब!

  10. Udan Tashtari says:
    10 अप्रैल 2012 को 8:11 am

    छा गये आप तो!! वाह!

  11. azad mohammed mansuri says:
    9 अगस्त 2012 को 11:18 pm

    'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
    आ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें

  12. azad mohammed mansuri says:
    9 अगस्त 2012 को 11:21 pm

    'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
    आ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें

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