मौसम बदलते रहते हैं...


वक़्त-दर-वक़्त
मौसम बदलते रहते हैं
मगर
नहीं बदलता
रोज़ी-रोटी के लिए
काम में जुटे रहने का सिलसिला...
-फ़िरदौस ख़ान
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9 Response to "मौसम बदलते रहते हैं..."

  1. नीरज गोस्वामी says:
    10 अक्तूबर 2008 को 11:28 am

    बिल्कुल सही कहा आपने...थोड़े से लफ्जों में जीवन की सच्चाई...
    नीरज

  2. मौसम says:
    10 अक्तूबर 2008 को 11:34 am

    आपने कम लफ्ज़ों ज़िन्दगी की हक़ीक़त बयां कर दी...बहुत ख़ूब...

  3. neeshoo says:
    10 अक्तूबर 2008 को 12:00 pm

    क्या बात है फिरदौस जी । बढिया लिखा है

  4. rakhshanda says:
    10 अक्तूबर 2008 को 12:13 pm

    कम लफ्जों में बहुत कुछ कह दिया आपने....

  5. seema gupta says:
    10 अक्तूबर 2008 को 12:15 pm

    नहीं बदलता
    रोज़ी-रोटी के लिए
    काम में जुटे रहने का सिलसिला...
    " han jeevna ka sach yhee hai, jiske liye din raat inssan sochta or kerta hai'

    regards

  6. मौसम says:
    10 अक्तूबर 2008 को 1:12 pm

    असलह के बल पर ताक़त का मुज़ाहिरा...

    हमारे ब्लॉग पर देखें...आपसे ही प्रेरणा ली है...

  7. Dr. Amar Jyoti says:
    10 अक्तूबर 2008 को 2:57 pm

    'दाल रोटी न हो तो जग सूना
    जीते मरते हैं दाल-रोटी से।'

  8. Udan Tashtari says:
    10 अक्तूबर 2008 को 4:04 pm

    क्या बात है!! वाह!

  9. dr. ashok priyaranjan says:
    11 अक्तूबर 2008 को 1:48 am

    sach kaha aapney. vastav mein yahi jindagi hai.

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