फ़िरदौस ख़ान : लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी
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फ़िरदौस ख़ान को लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी के नाम से जाना जाता है. वे शायरा,
लेखिका और पत्रकार हैं. वे एक आलिमा भी हैं. वे रूहानियत में यक़ीन रखती हैं और
सू...
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10 अक्टूबर 2008 को 11:28 am बजे
बिल्कुल सही कहा आपने...थोड़े से लफ्जों में जीवन की सच्चाई...
नीरज
10 अक्टूबर 2008 को 11:34 am बजे
आपने कम लफ्ज़ों ज़िन्दगी की हक़ीक़त बयां कर दी...बहुत ख़ूब...
10 अक्टूबर 2008 को 12:00 pm बजे
क्या बात है फिरदौस जी । बढिया लिखा है
10 अक्टूबर 2008 को 12:13 pm बजे
कम लफ्जों में बहुत कुछ कह दिया आपने....
10 अक्टूबर 2008 को 12:15 pm बजे
नहीं बदलता
रोज़ी-रोटी के लिए
काम में जुटे रहने का सिलसिला...
" han jeevna ka sach yhee hai, jiske liye din raat inssan sochta or kerta hai'
regards
10 अक्टूबर 2008 को 1:12 pm बजे
असलह के बल पर ताक़त का मुज़ाहिरा...
हमारे ब्लॉग पर देखें...आपसे ही प्रेरणा ली है...
10 अक्टूबर 2008 को 2:57 pm बजे
'दाल रोटी न हो तो जग सूना
जीते मरते हैं दाल-रोटी से।'
10 अक्टूबर 2008 को 4:04 pm बजे
क्या बात है!! वाह!
11 अक्टूबर 2008 को 1:48 am बजे
sach kaha aapney. vastav mein yahi jindagi hai.