मेरा साथ निभाना होगा...


सामने ग़ैर के हंसते हुए आना होगा
ऐ मेरे दर्द, मेरा साथ निभाना होगा

देख लेना मेरी तक़दीर भी चमकेगी ज़रूर
मेरी आवाज़ से रौशन ये ज़माना होगा

बेख़्याली में तुझे देख लिया था यूं ही
मुझको मालूम न था दिल ये दिवाना होगा

तेरी यादों का कफ़न ओढ़ के सो जाऊंगी
दफ़न होकर भी मुझे प्यार निभाना होगा
-फ़िरदौस ख़ान
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2 Response to "मेरा साथ निभाना होगा..."

  1. Udan Tashtari says:
    22 अगस्त 2008 को 12:50 am

    बहुत उम्दा, बहुत बढिया.

  2. sayeed.journalist says:
    22 अगस्त 2008 को 11:22 am

    देख लेना मेरी तक़दीर भी चमकेगी ज़रूर
    मेरी आवाज़ से रौशन ये ज़माना होगा

    बहुत ख़ूब...

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