लुत्फ़ जब भी किसी मंज़र का उठाया हमने...

लुत्फ़ जब भी किसी मंज़र का उठाया हमने
दिल को बेचैन-सा वीरान सा पाया हमने

आज फिर याद किया धूप में जलकर उसको
आज फिर छत पे वही ख़्वाब बुलाया हमने

हादसा आज अचानक वही फिर याद आया
कितनी मुश्किल से जिसे दिल से भुलाया हमने

नर्म झोंके की तरह दिल को जो छूकर गुज़रा
ग़म उसी शख्स का ताउम्र उठाया हमने

जिसको ठुकरा दिया 'फ़िरदौस' जहां ने, उसको
अपने गीतों में सदा ख़ूब सजाया हमने
-फ़िरदौस ख़ान
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3 Response to "लुत्फ़ जब भी किसी मंज़र का उठाया हमने..."

  1. Advocate Rashmi saurana says:
    20 अगस्त 2008 को 4:29 pm

    bhut hi sundar rachana. jari rhe.

  2. Udan Tashtari says:
    20 अगस्त 2008 को 7:42 pm

    बहुत उम्दा

  3. sayeed.journalist says:
    22 अगस्त 2008 को 11:25 am

    हादसा आज अचानक वही फिर याद आया
    कितनी मुश्किल से जिसे दिल से भुलाया हमने

    नर्म झोंके की तरह दिल को जो छूकर गुज़रा
    ग़म उसी शख्स का ताउम्र उठाया हमने

    दिलकश और बेहतरीन ग़ज़ल है...

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