देव की जान


बचपन में दादी जान से कहानी सुना करते थे कि एक देव की जान एक तोते में क़ैद थी... सोचते थे, ऐसा कैसे हो सकता है... लेकिन अब समझ में आया कि ऐसा बिल्कुल हो सकता है... सच ! कहानियां कितनी सच्ची हुआ करती हैं... बस, वक़्त से साथ उनके किरदार बदल जाया करते हैं...
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1 Response to "देव की जान"

  1. saleem malik says:
    11 मई 2016 को 6:41 pm

    सबसे ख़ास बात यह ही है, 'वक़्त से साथ उनके किरदार बदल जाया करते हैं...' !!!

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