मुहब्बत की चमक



मेरे महबूब
तुम्हारी आंखों में
मुहब्बत की
जो चमक है
उसी से तो
मेरी दुनिया रौशन है...
-फ़िरदौस ख़ान

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1 Response to " मुहब्बत की चमक"

  1. राजेंद्र कुमार says:
    12 नवंबर 2015 को 4:09 pm

    आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (13.11.2015) को "इंसानियत का धर्म"(चर्चा अंक-2159) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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