पंजाबी की किताबें...


बात बहुत पुरानी है... हमारा बीए का तीसरा साल था... हमने पंजाबी विषय लिया हुआ था...  पंजाबी की किता्बें मिल नहीं रही थीं... हम शहर की सबसे पुरानी दुकान पर गए, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहां सब किताबें मिल जाती हैं... लेकिन हमें वहां भी किताबें नहीं मिलीं... पूरे शहर में पंजाबी के पांच ही स्टुडेंट्स थे, बाक़ी चार के पास किताबें थीं, जो बाहर से मंगवाई गई थीं...
हम बहुत परेशान थे कि क्या करें... हमारे एक पारिवारिक मित्र ने हमसे परेशानी की वजह पूछी, तो हमने उन्हें बताया कि हमें पंजाबी की किताबें नहीं मिल रही हैं... उन्होंने कहा कि तुम प्रकाशक का पता देना... हमने अगले दिन हमने उन्हें प्रकाशक का पता दे दिया... दो-तीन दिन बाद हमने उन्हें फ़ोन किया, तो उन्होंने कहा कि तुमने काम बता दिया है, इसलिए अब ये तुम्हारा नहीं, मेरा काम है... अब दोबारा इसका ज़िक्र मत करना... बात हफ़्ते (शनिवार) की थी... पीर (सोमवार) के रोज़ शाम को वो हमारे घर आए और हमें किताबें दे दीं... उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के दौरे की वजह से उन्हें छुट्टी नहीं मिल रही थी... इसलिए इतवार को वे पंजाब से हमारे लिए किताबें लेकर आए...
वाक़ई, ऐसे लोग भी होते हैं इस दुनिया में... हम जब भी पंजाबी की कोई किताब देखते हैं, तो वो मोहतरम याद आ जाते हैं... शुक्रिया मेरे मोहसिन...
(ज़िन्दगी की किताब का एक वर्क़)

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