पूनम की रात...


आज
पूनम की रात है
और चांद
आसमान में
मुस्करा रहा है
तारे भी
खिलखिला रहे हैं

सच
कितनी भली है
पूनम की ये चांदनी रात
दिल चाहता है
इसे सहेज कर
रख लूं

क्या ख़बर
ज़िंदगी की
कोई अंधियारी रात
इसकी यादों से ही
रौशन हो जाए
और
ज़िंदगी के किसी मोड़ पर
उजाला बिखर जाए...
-फ़िरदौस ख़ान
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1 Response to "पूनम की रात..."

  1. Kavita Rawat says:
    2 अप्रैल 2015 को 6:46 pm

    खुशनुमा पल कब पूनम के चाँद की तरह गुम हो जाय कुछ नहीं कह सकते ...बहुत सुन्दर रचना

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