सुकून...


इंसान ज़िंदगी में बहुत कुछ चाहता है, जैसे दौलत, इज़्ज़त और शौहरत, लेकिन इन सबके बीच वह सुकून को भूल जाता है. जब वह दुनिया का हर सुख भोग लेता है, तब उसे सुकून की तलाश होती है. और इसी सुकून को पाने के लिए वह न जाने कहां-कहां भटकता है. मगर सुकून बाहर कहीं भी नहीं मिलता, क्योंकि इसे इंसान को अपने भीतर ही खोजना पड़ता है. दरअसल, सुकून इंसान को उसके नेक कर्मों की बदौलत ही मिलता है...

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1 Response to "सुकून..."

  1. Anita says:
    8 नवंबर 2014 को 7:04 pm

    सही कहा है...

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