तुम्हारी मुहब्बत के फूल...


मेरे महबूब...
उम्र की रहगुज़र में 
हर क़दम पर मिले 
तुम्हारी मुहब्बत के फूल...
अहसास की शिद्दत से दहकते 
जैसे सुर्ख़ गुलाब के फूल...

उम्र की तपती दोपहरी में 
घनी ठंडी छांव से 
जैसे पीले अमलतास के फूल...

आंखों में इन्द्रधनुषी सपने संजोये
गोरी हथेलियों पर सजे 
जैसे ख़ुशरंग मेहंदी के फूल...  

दूधिया चांदनी रात में 
ख़्वाहिशों के बिस्तर पर बिछे 
जैसे महकते बेला के फूल...

मेरे महबूब 
मुझे हर क़दम पर मिले 
तुम्हारी मुहब्बत के फूल...
-फ़िरदौस ख़ान  

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • Twitter
  • RSS

16 Response to "तुम्हारी मुहब्बत के फूल..."

  1. shikha varshney says:
    10 जनवरी 2011 को 10:33 pm

    सभी फूल बहुत प्यारे हैं .:)

  2. Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार says:
    11 जनवरी 2011 को 6:17 am

    फ़िरदौस ख़ान जी
    नमस्कार !

    मेरे महबूब
    मुझे हर क़दम पर मिले
    तुम्हारी मुहब्बत के फूल...


    मुबारकबाद !
    नज़्म की ख़ुशगुफ़्तारी काबिले-ता'रीफ़ है …

    ~*~हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

  3. संजय भास्कर says:
    11 जनवरी 2011 को 8:44 am

    वाह ! कितनी सुन्दर पंक्तियाँ हैं ... मन मोह लिया इस चित्र ने तो !

  4. sada says:
    11 जनवरी 2011 को 11:16 am

    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द ...।

  5. वन्दना says:
    11 जनवरी 2011 को 12:35 pm

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

  6. रश्मि प्रभा... says:
    11 जनवरी 2011 को 5:16 pm

    उम्र की तपती दोपहरी में
    घनी ठंडी छांव से
    जैसे पीले अमलतास के फूल...
    kuch un phulon se dahakte shabd aur bhaw, bahut sundar

  7. M VERMA says:
    11 जनवरी 2011 को 7:42 pm

    मेरे महबूब
    मुझे हर क़दम पर मिले
    तुम्हारी मुहब्बत के फूल...
    सुन्दर भाव .. एहसास मुखर हो तो फूल मिलते ही हैं

  8. शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' says:
    11 जनवरी 2011 को 7:43 pm

    फूलों के इतने रंग और ऐसी खुशबू...
    आपके फ़न का बेहतरीन कमाल है.

  9. ePandit says:
    11 जनवरी 2011 को 8:48 pm

    सुन्दर पंक्तियाँ।

  10. भारतीय नागरिक - Indian Citizen says:
    12 जनवरी 2011 को 12:34 am

    बहुत बढ़िया, सुन्दर...

  11. वाणी गीत says:
    12 जनवरी 2011 को 7:48 am

    इन फूलों की भीनी भीने खुशबू रूह तक को भिगो रही है ...
    खूबसूरत एहसास !

  12. ZEAL says:
    13 जनवरी 2011 को 1:23 pm

    मन की कोमल भावनाओं को जगाती बेहतरीन प्रस्तुति !

  13. मौसम says:
    13 जनवरी 2011 को 10:16 pm

    मेरे महबूब...
    उम्र की रहगुज़र में
    हर क़दम पर मिले
    तुम्हारी मुहब्बत के फूल...
    अहसास की शिद्दत से दहकते
    जैसे सुर्ख़ गुलाब के फूल...


    एक-एक लफ़्ज़ दिल में उतर गय फ़िरदौस.......

  14. नीरज बसलियाल says:
    14 जनवरी 2011 को 5:38 pm

    बेहद खूबसूरत और पाकीज़ा

  15. Kailash C Sharma says:
    17 जनवरी 2011 को 7:47 pm

    मेरे महबूब
    मुझे हर क़दम पर मिले
    तुम्हारी मुहब्बत के फूल..

    फूलों की खुशबू ने अंतर्मन को भिगो दिया..बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति.

  16. संजय भास्कर says:
    18 जनवरी 2011 को 6:56 pm

    बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति.

एक टिप्पणी भेजें