यही मुहब्बत है...

कड़ी धूप थी
आसमान से
शोले बरस रहे थे...
उसने कहा-
कितनी प्यारी खिली चांदनी है...
मैंने कहा-
बिलकुल...
क्योंकि
मुहब्बत में दिल की सुनी जाती है, ज़ेहन की नहीं
यही मुहब्बत है, मुहब्बत की रिवायत है...
-फ़िरदौस ख़ान
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11 Response to "यही मुहब्बत है..."

  1. Amitraghat says:
    5 अप्रैल 2010 को 11:30 am

    बहुत ही बढ़िया विचार और कविता....."

  2. संजय भास्कर says:
    5 अप्रैल 2010 को 11:32 am

    किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

  3. संजय भास्कर says:
    5 अप्रैल 2010 को 11:32 am

    एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब

  4. दिगम्बर नासवा says:
    5 अप्रैल 2010 को 11:40 am

    वाह .. क्या लाजवाब बात कही ... मुहब्बत में सच में दिल की सुनी जाती है ...

  5. RAJNISH PARIHAR says:
    5 अप्रैल 2010 को 2:45 pm

    बहुत ही बढ़िया शब्दों को पिरो कर बड़ी शानदार सी ग़ज़ल पेश की है आपने!!

  6. M VERMA says:
    5 अप्रैल 2010 को 7:28 pm

    जी हाँ यही मुहब्बत है यही मुहब्बत की रिवायत है ..
    बहुत खूब बेहतरीन

  7. Apanatva says:
    5 अप्रैल 2010 को 7:29 pm

    bahut khoob........agar unka rahe sath
    to din ko kahe raat , lage raat

  8. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:
    5 अप्रैल 2010 को 8:11 pm

    सही बात, सच्ची बात!

  9. शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' says:
    5 अप्रैल 2010 को 11:22 pm

    यही मुहब्बत है, मुहब्बत की रिवायत है...
    बहुत खूब.
    ’जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे’....
    इस बात को अलग ही अंदाज़ में खूबसूरती से कहा गया है.
    मुबारकबाद.

  10. मौसम says:
    6 अप्रैल 2010 को 8:10 am

    कड़ी धूप थी
    आसमान से
    शोले बरस रहे थे...
    उसने कहा-
    कितनी प्यारी खिली चांदनी है...
    मैंने कहा-
    बिलकुल
    क्योंकि...
    मुहब्बत में दिल की सुनी जाती है, ज़हन की नहीं
    यही मुहब्बत है, मुहब्बत की रिवायत है...


    एक-एक लफ़्ज़ समर्पण के जज्बे से सराबोर...

  11. Dhiraj Shah says:
    6 अप्रैल 2010 को 3:22 pm

    मुहब्ब्त एहसास का दुसरा नाम है।

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