परस्तिश


हमारी एक दोस्त ने हमसे पूछा- क्या तुम्हारी उनसे लड़ाई होती है.
हमने कहा- नहीं, कभी नहीं होती.
वो हैरान होकर बोली- ऐसा कैसे हो सकता है कि आप दोनों कभी लड़ते ही नहीं. ये तो नामुमकिन है. जहां मुहब्बत होती है, वहां गिले-शिकवे भी होते हैं और लड़ाइयां भी होती हैं.
हमने कहा- तुम सही कहती हो, जहां मुहब्बत होती है, वहां गिले-शिकवे भी होते हैं और लड़ाई-झगड़े भी ख़ूब हुआ करते हैं... लेकिन जहां मुहब्बत में परस्तिश हो, वहां कैसे गिले-शिकवे और कैसे लड़ाई-झगड़े...
(ज़िन्दगी की किताब का एक वर्क़)

तस्वीर गूगल से साभार
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1 Response to "परस्तिश"

  1. Anita says:
    26 अगस्त 2015 को 11:07 am

    बहुत खूब..

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