फ़िरदौस ख़ान : लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी
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फ़िरदौस ख़ान को लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी के नाम से जाना जाता है. वे शायरा,
लेखिका और पत्रकार हैं. वे एक आलिमा भी हैं. वे रूहानियत में यक़ीन रखती हैं और
सू...
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11 नवंबर 2008 को 3:38 pm बजे
waah bahut hi khubsurat suhana man bhawan mausam,kash har pal aisa hi ho,sundar nazm badhai
11 नवंबर 2008 को 4:09 pm बजे
काश! कभी ऐसा हो...
ज़िन्दगी में
मुहब्बत का मौसम हो
bahut khub likha aapne
11 नवंबर 2008 को 4:23 pm बजे
काश! कभी ऐसा हो...
ज़िन्दगी में
मुहब्बत का मौसम हो
nice to read..
regards
11 नवंबर 2008 को 4:44 pm बजे
आमीन।
वैसे निराश न हों। 'वो सुबह कभी तो आएगी'
11 नवंबर 2008 को 5:18 pm बजे
काश! कभी ऐसा हो...
ज़िन्दगी में
मुहब्बत का मौसम हो...
--बहुत उम्दा कहा!! वाह!
11 नवंबर 2008 को 5:45 pm बजे
काश की दुनिया की सभी जिन्दगियों में एक साथ यह मौसम आए और कभी न जाए।
11 नवंबर 2008 को 6:12 pm बजे
काश! कभी ऐसा हो...
ज़िन्दगी में
मुहब्बत का मौसम हो...
bahut khub
12 नवंबर 2008 को 2:17 am बजे
बहुत अच्छी रचना के िलए साधुवाद ।
12 नवंबर 2008 को 10:01 am बजे
अगर दिल में मोहब्बत हो तो ऐसा मौसम हमेशा रहता है.....बहुत अच्छा लिखा आपने!
12 नवंबर 2008 को 12:41 pm बजे
आमीन
lekin mohobbat ka mausam toh hai hi aapki zindagi main. yeh alag baat hai ki kis se aur kis tarah se
14 नवंबर 2008 को 2:29 pm बजे
रूमानी रचना के लिए बधाई!
14 नवंबर 2008 को 6:05 pm बजे
"kaash kabhi aisa ho.." waah ! kis saleeqe se zindgi ko aawaaz di hai aapne. Ek musalsal.si pur.umeed sadaa aur uss pr umdaa t`khayyul, nafees lehjaa... aur munt`khb tashbeeh....aafreeN. mubarakbaad qubool farmaaeiN. ---MUFLIS---
16 नवंबर 2008 को 2:15 pm बजे
काश! कभी ऐसा हो...
ज़िन्दगी में
मुहब्बत का मौसम हो
वाकई जरूरत है फिरदौस जी,
आमीन..!
19 नवंबर 2008 को 12:25 am बजे
वैसे तो मुहब्बत का मौसम पूरी ज़िन्दगी के हर लम्हे में बसा हुआ है जहां मुहब्बत का हर पहलू देखने को मिलता रहता है - ख़ुशी, ग़म तो कभी इंतज़ार।
एक ख़ूबसूरत रचना है।। बधाई।
20 नवंबर 2008 को 2:37 pm बजे
apke blog ko apne link me rakha hai ummid hai aapko aiteraaz nahi hoga,
21 नवंबर 2008 को 1:50 pm बजे
आपकी यह ग़ज़ल मुझे इतनी देर से पढ़ने को क्यों मिली। वाकई बहुत उम्दा ग़ज़लें हैं। मेरा दुर्भाग्य का मैं देर से यहां पहुंचा।
29 अक्टूबर 2014 को 1:30 pm बजे
कल 30/अक्तूबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !
30 अक्टूबर 2014 को 12:37 pm बजे
मुहब्बत का मौसम तो हर लम्हा होता है ... महसूस हो सके तो फिर बात है ...
30 अक्टूबर 2014 को 7:56 pm बजे
काश ऐसा हो पाता...बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...