चमकते ख़्वाब...


जब
ज़िन्दगी 
किसी ख़ामोश लम्हे की तरह
चुपके से
मेरे सिरहाने 
आकर खड़ी हो जाती है
तो
मैं सोना चाहती हूं
अपनी पलकों की छांव में 
किसी उजले दिन की तरह
चमकते ख़्वाबों को लिए हुए...
-फ़िरदौस ख़ान
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4 Response to " चमकते ख़्वाब..."

  1. Yashwant Yash says:
    8 मई 2014 को 10:12 am

    कल 09/05/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

  2. सुशील कुमार जोशी says:
    9 मई 2014 को 3:22 pm

    वाह !

  3. Kaushal Lal says:
    9 मई 2014 को 4:53 pm

    बहुत सुन्दर....

  4. Darshan jangra says:
    11 मई 2014 को 11:18 pm

    बहुत सुन्दर

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