Firdaus Diary

मैं लफ्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी हूं... Main Lafzon Ke Jazeere Ki Shahzadi Hoon...میں لفظوں کے جزیرے کی شہزادی ہوں

शुक्रवार, जून 19, 2026

मेरे महबूब...

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आज उनकी सालगिरह है, जिनके क़दमों में हम अपनी अक़ीदत के फूल चढ़ाते हैं... इस मुबारक मौक़े पर उन्हें समर्पित एक नज़्म ’मेरे महबूब’ पेश-ख़िदमत है.....
शुक्रवार, जून 12, 2026

पापा की बरसी

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ज़िन्दगी में कुछ वाक़ियात ऐसे हुआ करते हैं, जो इंसान को भीतर से तोड़ देते हैं. पापा का जाना भी एक ऐसा ही वाक़िया है. कहते हैं कि किसी लड़की ...
बुधवार, जून 10, 2026

डॉ. फ़िरदौस ख़ान का परिचय

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डॉ. फ़िरदौस ख़ान एक इस्लामी विदुषी, शायरा, कहानीकार, लेखिका, निबंधकार, पत्रकार, सम्पादक और अनुवादक हैं। उन्हें ‘लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी’ के...
शनिवार, जून 06, 2026

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

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   डॉ फ़िरदौस ख़ान इंसान की ज़िन्दगी का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा बचपन ही होता है, क्योंकि बचपन हर फ़िक्र से आज़ाद और बेगाना होता है। बचपन की यादें ह...

अम्मी से हालात का मुक़ाबला करना सीखा

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अम्मी जान कहा करती हैं कि इंसान को कभी बुज़दिल नहीं होना चाहिए. बचपन में बिजली चली जाती और अंधेरे में हमें दूसरे कमरे में जाने में ख़ौफ़ आता, ...
बुधवार, अप्रैल 29, 2026

हमें आंधियों से निस्बत है...

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-डॉ. फिरदौस ख़ान   आंधियों का मौसम शुरू हो चुका है. हमें आंधियां बहुत पसंद हैं. हमें आंधियों से निस्बत है. ये इस बात की अलामत हैं कि हमा...
रविवार, अप्रैल 26, 2026

निडर पत्रकारिता की मिसाल: 10 मुस्लिम महिला चेहरे

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डॉ. फ़िरदौस ख़ान को 'लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी' कहा जाता है। वे एक विद्वान, कवयित्री, कहानीकार, पत्रकार, सम्पादक और अनुवादक हैं जिनका ...
शुक्रवार, अप्रैल 03, 2026

बारिश की उदासी...

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  रात से बारिश हो रही है. लड़की को बारिश का मौसम हमेशा से अच्छा लगता है, लेकिन आज न जाने क्यों वह उदास है. कुछ बरस पहले जब जाड़ों के आख़ि...
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बुधवार, मार्च 25, 2026

ख़ामोश रात की तन्हाई में...

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नज़्म जब कभी ख़ामोश रात की तन्हाई में सर्द हवा का इक झोंका मुहब्बत के किसी अनजान मौसम का कोई गीत गाता है तो मैं अपने माज़ी के वर्क़ ...
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इक राह तो वो होगी, तुम तक जो पहुंचती है...

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मेरे महबूब ! मुझे हर उस शय से मुहब्बत है, जो तुम से वाबस्ता है. हमेशा से मुझे सफ़ेद रंग अच्छा लगता है. बाद में जाना कि ऐसा क्यों था. त...
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फ़िरदौस ख़ान
शायरा, लेखिका और पत्रकार. लोग लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी कहते हैं. उर्दू, हिन्दी, इंग्लिश और पंजाबी में लेखन. दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में कई साल तक सेवाएं दीं. अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं का सम्पादन किया. ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर कार्यक्रमों का प्रसारण. ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनल के लिए एंकरिंग भी की है. देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और समाचार व फीचर्स एजेंसी के लिए लेखन. फ़हम अल क़ुरआन लिखा. सूफ़ीवाद पर 'गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' नामक एक किताब प्रकाशित. इसके अलावा डिस्कवरी चैनल सहित अन्य टेलीविज़न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन. उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए अनेक पुरस्कारों ने सम्मानित. इसके अलावा कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी शिरकत की. कई बरसों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम ली. फ़िलहाल 'स्टार न्यूज़ एजेंसी' और 'स्टार वेब मीडिया' में समूह संपादक हैं. अपने बारे में एक शेअर पेश है- नफ़रत, जलन, अदावत दिल में नहीं है मेरे अख़लाक़ के सांचे में अल्लाह ने ढाला है…
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