मैं लफ्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी हूं...
Main Lafzon Ke Jazeere Ki Shahzadi Hoon...میں لفظوں کے جزیرے کی شہزادی ہوں
रविवार, जून 03, 2018
औरत
अल्लाह ने औरत को एक ऐसी सिफ़्त दी है कि वह जितनी रहमदिल है, उतनी ही संगदिल भी है... वह चाहे, तो अपने महबूब के लिए ख़ुद को फ़ना कर डाले... अगर वह सख़्त हो जाए, तो कोई उसकी एक निगाहे-रफ़ाक़त भी पा नहीं सकता...
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