मैं लफ्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी हूं... Main Lafzon Ke Jazeere Ki Shahzadi Hoon...میں لفظوں کے جزیرے کی شہزادی ہوں
चंद लफ्जों में खत के खासियत का खुलासा
bahut khoob.........kya baat hai.
चंद लफ़्ज़ों.... में खूबसूरत नज़्म....
खूबसूरत...रूह पर टंके इन खतों के हर्फ़ ही उसकी मुकद्दर की जाफ़रानी इबारत बन जाते हैं..हमेशा के लिये..चंद पंक्तियों मे कमाल..
क्या बात है, 'दूधिया वरक़''जाफ्ररानी हर्फ़'औररूह पर टांक देने की बात......उपमाओं के हवाले से ऐसी नज्म ब्लाग पर तो कहीं नज़र नही आई फिरदौस साहिबा,आप तो गुलज़ार साहब के लिए 'खतरा' बनती जा रही हैं!शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
ख़त...दूधिया वरक़ों पर लिखेज़ाफ़रानी हर्फ़उसनेकाग़ज़ पर नहींमेरी रूह पर टांक दिए थे...सुब्हानअल्लाह.......अब क्या कहें.......लफ़्ज़ ही नहीं मिल रहे हैं.......
चंद लफ्जों में खत के खासियत का खुलासा
जवाब देंहटाएंbahut khoob.........kya baat hai.
जवाब देंहटाएंचंद लफ़्ज़ों.... में खूबसूरत नज़्म....
जवाब देंहटाएंखूबसूरत...रूह पर टंके इन खतों के हर्फ़ ही उसकी मुकद्दर की जाफ़रानी इबारत बन जाते हैं..हमेशा के लिये..
जवाब देंहटाएंचंद पंक्तियों मे कमाल..
क्या बात है,
जवाब देंहटाएं'दूधिया वरक़'
'जाफ्ररानी हर्फ़'
और
रूह पर टांक देने की बात......
उपमाओं के हवाले से ऐसी नज्म
ब्लाग पर तो कहीं नज़र नही आई
फिरदौस साहिबा,
आप तो गुलज़ार साहब के लिए 'खतरा' बनती जा रही हैं!
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
ख़त...
जवाब देंहटाएंदूधिया वरक़ों पर लिखे
ज़ाफ़रानी हर्फ़
उसने
काग़ज़ पर नहीं
मेरी रूह पर टांक दिए थे...
सुब्हानअल्लाह.......अब क्या कहें.......लफ़्ज़ ही नहीं मिल रहे हैं.......