मैं लफ्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी हूं...
Main Lafzon Ke Jazeere Ki Shahzadi Hoon...میں لفظوں کے جزیرے کی شہزادی ہوں
शनिवार, दिसंबर 19, 2009
शायद, यही ज़िन्दगी है...
ज़िन्दगी एक सहरा है...और ख़ुशियां सराब...इंसान ख़ुशियों को अपने दामन में समेट लेने के लिए क़दम जितने आगे बढ़ाता है...ख़ुशियां उतनी ही उससे दूर होती चली जाती हैं...शायद, यही ज़िन्दगी है...
फिरदौस साहिबा, 'इंसान जितना.....यही ज़िंदगी है ऐसा क्यूं सोचती हैं आप? जिगर साहब का एक शेर समाअत फरमायें- चला जाता हूं हंसता खेलता दौरे-हवादिस से अगर आसानियां हों, ज़िंदगी दुश्वार हो जाये... शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
कोमल भावों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति। -
जवाब देंहटाएंhttp://drashokpriyaranjan.blogspot.com
http://www.ashokvichar.blogspot.com
वाह बहुत सुंदर बात
जवाब देंहटाएंफिरदौस साहिबा,
जवाब देंहटाएं'इंसान जितना.....यही ज़िंदगी है
ऐसा क्यूं सोचती हैं आप?
जिगर साहब का एक शेर समाअत फरमायें-
चला जाता हूं हंसता खेलता दौरे-हवादिस से
अगर आसानियां हों, ज़िंदगी दुश्वार हो जाये...
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
उलझन जीवन की सखा कभी न छूटे साथ।
जवाब देंहटाएंखुशियाँ मिलतीं हैं तभी मिले हाथ से हाथ।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
सही बात कही आपने शुभकामनायें
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