रविवार, अगस्त 16, 2009

नगमें रफ़ाक़तों के सुनाती हैं बारिशें...


नगमें रफ़ाक़तों के सुनाती हैं बारिशें
अरमान ख़ूब दिल में जगाती हैं बारिशें

बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें

मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें

ख़ामोश घर की छत की मुंडेरों पे बैठकर
परदेसियों को आस बंधाती हैं बारिशें

जैसे बगैर रात के होती नहीं सहर
यूं साथ बादलों का निभाती हैं बारिशें

सहरा में खिल उठे कई महके हुए चमन
बंजर ज़मीं में फूल खिलाती हैं बारिशें

'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
आ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें
-फ़िरदौस ख़ान

12 टिप्‍पणियां:

  1. मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
    रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें

    बहतरीन ग़ज़ल. क्या बात है.

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत उम्दा गज़ल है!!

    ख़ामोश घर की छत की मुंडेरों पे बैठकर
    परदेसियों को आस बंधाती हैं बारिशें

    जवाब देंहटाएं
  3. बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
    इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें

    मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
    रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें
    waah baarish ki tarah hi khubsurat nazm,har alfaz ek naya jazbaat liye,lajawab

    जवाब देंहटाएं
  4. मगर कभी कभी बारिश इतनी देर से होती है कि उसके इन्तिज़ार में गुल ही नहीं बल्कि शाख या कि दरख्त तक सूख जाता है. उस दरख्त को उस आसमानी बारिश कि दरकार नहीं होती बल्कि उसके किसी अपने के दीदा-ए-तर से गिरा हुआ एक गौहर उसको ज़िन्दगी बख्श देता है.

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत ही शानदार ग़ज़ल है...

    आज बहुत खुशगवार मौसम है...बिलकुल चम्पई उजाले और सुरमई अंधेरे वाला दिन...आसमान पर छाई काली घनघोर घटाएं...माहौल को रूमानी बना रही हैं...


    नगमें रफ़ाक़तों के सुनाती हैं बारिशें
    अरमान ख़ूब दिल में जगाती हैं बारिशें

    बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
    इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें

    जवाब देंहटाएं
  6. 'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
    आ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें

    जवाब देंहटाएं
  7. 'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
    आ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें

    जवाब देंहटाएं