नगमें रफ़ाक़तों के सुनाती हैं बारिशें
बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें
मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें
ख़ामोश घर की छत की मुंडेरों पे बैठकर
परदेसियों को आस बंधाती हैं बारिशें
जैसे बगैर रात के होती नहीं सहर
यूं साथ बादलों का निभाती हैं बारिशें
सहरा में खिल उठे कई महके हुए चमन
बंजर ज़मीं में फूल खिलाती हैं बारिशें
'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
आ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें
-फ़िरदौस ख़ान

मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
जवाब देंहटाएंरंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें
बहतरीन ग़ज़ल. क्या बात है.
बहुत उम्दा गज़ल है!!
जवाब देंहटाएंख़ामोश घर की छत की मुंडेरों पे बैठकर
परदेसियों को आस बंधाती हैं बारिशें
bahut hi sundar rachana
जवाब देंहटाएंउम्दा गज़ल
जवाब देंहटाएंबारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
जवाब देंहटाएंइक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें
मिस्ले-धनक जुदाई के ल्म्हाते-ज़िंदगी
रंगीन मेरे ख़्वाब बनाती हैं बारिशें
waah baarish ki tarah hi khubsurat nazm,har alfaz ek naya jazbaat liye,lajawab
मगर कभी कभी बारिश इतनी देर से होती है कि उसके इन्तिज़ार में गुल ही नहीं बल्कि शाख या कि दरख्त तक सूख जाता है. उस दरख्त को उस आसमानी बारिश कि दरकार नहीं होती बल्कि उसके किसी अपने के दीदा-ए-तर से गिरा हुआ एक गौहर उसको ज़िन्दगी बख्श देता है.
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार ग़ज़ल है...
जवाब देंहटाएंआज बहुत खुशगवार मौसम है...बिलकुल चम्पई उजाले और सुरमई अंधेरे वाला दिन...आसमान पर छाई काली घनघोर घटाएं...माहौल को रूमानी बना रही हैं...
नगमें रफ़ाक़तों के सुनाती हैं बारिशें
अरमान ख़ूब दिल में जगाती हैं बारिशें
बारिश में भीगती है कभी उसकी याद तो
इक आग-सी हवा में लगाती हैं बारिशें
वाकई शानदार है।
जवाब देंहटाएंबहुत ख़ूब!
जवाब देंहटाएंछा गये आप तो!! वाह!
जवाब देंहटाएं'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
जवाब देंहटाएंआ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें
'फ़िरदौस' अब क़रीब मौसम बहार का
जवाब देंहटाएंआ जाओ कब से तुमको बुलाती हैं बारिशें