घर
एक घर ऐसा हो
जिसकी बुनियाद
खुलूस की ईंटों से बनी हो
जिसके आंगन में
बेला और मेहंदी महकती हों
जिसकी क्यारियों में
रफ़ाक़तों के फूल खिलते हों
जिसकी दीवारें
क़ुर्बतों की सफ़ेदी से पुती हों
जिसकी छत पर
दुआएं
चांद-सितारे बनकर चमकती हों
जिसके दालान में
हसरतें अंगड़ाइयां लेती हों
जिसके दरवाज़ों पर
उम्र की हसीन रुतें
दस्तक देती हों
जिसकी खिड़कियों में
बच्चों-सी मासूम ख़ुशियां
मुस्कराती हों
और
जिसकी मुंडेरों पर
अरमानों के परिन्दे चहकते हों
बस, एक घर ऐसा हो
-फ़िरदौस ख़ान
Courtesy : Image Mikki Senkarik

tassavur ko mintne na dijiye.
जवाब देंहटाएंसभी सहजता से मिलें आपस में हो प्यार।
जवाब देंहटाएंसचमुच घर होता वही न होती तकरार।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.
haan sachmuch aisa hi to ghar hota hai
जवाब देंहटाएंaisa hi to socha tha
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति
behtreen
जवाब देंहटाएंShukriya in khoobsoorat lafzon ke liye...!
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