फिरदौस साहिबा, बस यूं समझिये, नज्म का सारा दारोमदार 'इश्क के घूंट' पर ही टिका है इस अंदाज़ में किसी के हो जाने के भाव को बिल्कुल नये शब्द मिले हैं शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
जिसके लिए लोगों ने इतना कुछ लिख/कह डाला उसे काफी के एक घूंट समाहित कर दिया - वाह-वाह लाजवाब - आपकी लेखनी सलामत रहे और यूँ ही चलती रहे - - हार्दिक शुभकामनाएं
प्यार के गहरे जज्बात
जवाब देंहटाएंलाजवाब कर दिया आपने।
जवाब देंहटाएंआपकी सोच को सलाम करता हूँ।
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बारिश की वो सोंधी खुश्बू क्या कहती है?
क्या सुरक्षा के लिए इज्जत को तार तार करना जरूरी है?
फिरदौस साहिबा,
जवाब देंहटाएंबस यूं समझिये,
नज्म का सारा दारोमदार
'इश्क के घूंट' पर ही टिका है
इस अंदाज़ में किसी के हो जाने के भाव को
बिल्कुल नये शब्द मिले हैं
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
जिसके लिए लोगों ने इतना कुछ लिख/कह डाला उसे काफी के एक घूंट समाहित कर दिया - वाह-वाह लाजवाब - आपकी लेखनी सलामत रहे और यूँ ही चलती रहे - - हार्दिक शुभकामनाएं
जवाब देंहटाएंइश्क़ का घूंट.......सुब्हानअल्लाह.......आपने तो इन तीन अल्फ़ाज़ में ही सब कुछ कह दिया.......लाजवाब कर दिया.......
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