मुहब्बत और रिश्ते...


  • कुछ लोग ऐसे हुआ करते हैं, जिनकी जगह हमारे दिल में हुआ करती है... वो हमारी रूह में बसा करते हैं... हमारी ज़िन्दगी में उनका रुतबा बहुत बुलंद होता है... ख़ूनी और काग़ज़ी रिश्ते बस इस दुनिया तक ही महदूद हैं, लेकिन रूहानी रिश्ते उस दुनिया में भी अपना वजूद रखेंगे...तकलीफ़ तब होती है, जब वही इंसान हमें ग़लत समझे, जो हमारी रूह में बसता है... 
  • मुहब्बत सिर्फ़ मुहब्बत होती है और कुछ नहीं... मुहब्बत सिर्फ़ देना जानती है... सावन के बरसते बादलों की मानिन्द... जिस तरह बादल अपनी आख़िरी बूंद तक प्यासी धरती पर उडेल देते हैं, इसी तरह मुहब्बत अपने महबूब को सराबोर कर देती है, मुहब्बत के जज़्बे से...
  • मुहब्बत की शिद्दत क्या होती है, इसे वही समझ सकता है, जिसे ख़ुदा ने मुहब्बत की नेमत से नवाज़ा हो...
  • मुहब्बत एक ऐसी ख़ामोश इबादत है, जिसके नतीजे में जन्नत नहीं...आंसू मिलते हैं...फिर भी लोग मुहब्बत करते हैं...
  • सबसे प्यारी दुआ वो हुआ करती है, जो महबूब के लिए की जाए...
  • सहराओं की ख़ाक छानना ही मुहब्बत की फ़ितरत है... इस राह के मुसाफ़िर को तख़्तो-ताज नहीं भाते...
  • मुहब्बत इंसान के वजूद को फ़ना कर दिया करती है... बाक़ी रहती है, तो सिर्फ़ महबूब की ज़ात...
  • मुहब्बत... दिल में बसती है, निगाहों से बयां होती है... 
  • मैं नहीं जानती कि मेरी क़िस्मत में क्या लिखा है... लेकिन वो हमेशा मेरे दिल में रहेगा...
  • क्यूं इंसान ख़ुद से ज़्यादा किसी और को चाहता है...
  • र से रफ़ाक़त... वो रफ़ाक़त का मुजस्सिम...
  • रिश्ते...इंसान सिर्फ़ अपनी ख़ुशी के लिए बनाता और तोड़ता है...क्यों, इंसान सिर्फ़ अपनी ख़ुशी के लिए सब कुछ बदल देना चाहता है...इंसानियत के हर क़ायदे को ताख़ पर रखकर...
  • दिल के रिश्ते निभ जाते हैं... और दिमाग़ के रिश्ते निभाने पड़ते हैं... 
  • हर इंसान को अपनी लड़ाई ख़ुद अकेले ही लड़नी पड़ती है... बिल्कुल अकेले...  कोई दूसरा उसके साथ सिर्फ़ हमदर्दी ही जता सकता है... इसलिए उठो, लड़ो और जिओ अपनी ज़िंदगी... 
  • किसी भी रिश्ते की बुनियाद मुहब्बत और यक़ीन पर ही क़ायम हुआ करती है... अगर ये नहीं हैं, तो वह रिश्ता बहुत दिन तक नहीं टिक सकता... 
  • ख़ूबसूरती सूरत की नहीं, सीरत की हुआ करती है... फिर भी लोग न जाने क्यों चेहरों में ही उलझ जाया करते हैं...
  • रिश्ता जिस्म है... और यक़ीन उसकी रूह... जब रूह पर चोट लगती है, रिश्ता भी ज़ख़्मी होता है...
  • मज़ाक़ भी सोच-समझकर ही करना चाहिए... कई बार एक मज़ाक़ ज़िन्दगी भर की ख़ुशियां निग़ल जाया करता है...
  • आभासी दुनिया के सुख भले ही आभासी हों, लेकिन दुख आभासी नहीं हुआ करते...
  • जिस तरह छोटी-छोटी बातें बड़ी ख़ुशियां दे जाती हैं, उसी तरह छोटी-छोटी बातें अकसर बड़े ज़ख़्म दे देती हैं...
  • जिन्हें जाना होता है, वो चले जाते हैं...लेकिन जो अपने होते हैं, वो मर कर भी नहीं जाते, यादों में हमेशा ज़िन्दा रहा करते हैं...
  • कुछ कलाइयां हमेशा सूनी रहा करती हैं... उनमें कभी चूड़ियां नहीं खनकतीं...
  • जिस रिश्ते की इब्तिदा ही झूठ से हो, उसका अंजाम...?
  • औरों को तकलीफ़ पहुंचाने वाले क्या चैन की नींद सो पाते होंगे...?
  • अपना वो हुआ करता है, जिसे हम दिल की हर बात बता देते हैं... बिना ये सोचे कि वो हमारे बारे में क्या सोचेगा...
  • इंसान ग़लती करता है, तो उसमें ग़लती मान लेने की सलाहियत और ग़लती की सज़ा भुगतने की हिम्मत भी होनी चाहिए... 
  • अकसर लोग किसी तीसरे बाहरी शख़्स के लिए अपने बरसों के रिश्ते ख़राब कर लिया करते हैं...
  • जांबाज़ दुश्मन पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन बुज़दिल दोस्त पर नहीं...
  • दिल में एक ही चीज़ रह सकती है... मुहब्बत या नफ़रत... अपने दिल में नफ़रत रखकर लोग अपने ख़ुदा का सामना कैसे करेंगे...?
  • ग़लतफ़हमियां अकसर रिश्तों की को निग़ल जाया करती हैं...
  • रिश्ते इंसान को हक़ जताने का हक़ देते हैं...
  • कुछ लोग अकसर अपनी कमज़ोरियां छुपाने के लिए इल्ज़ाम तराशी का सहारा लेते हैं...
  • किसी भी ’अपने’ पर इतना तो यक़ीन होना ही चाहिए कि आप उसे कॊल करेंगे और वो आपकी कॊल रिसीव करेगा... अगर इतना भी यक़ीन न हो, तो अपना कैसा...? 
  • बाज़ रिश्तों में इतने फ़ासले आ जाते हैं कि हम सामने वाले से न तो शिकायत कर पाते हैं और न ही कुछ पूछ पाते हैं...
  • अपना वही होता है, जिसे आपकी ख़ुशी अज़ीज़ हुआ करती है... और जो आपकी उदासी को मुस्कराहट में बदलने की कोशिश करे...
  • जो मुहब्बत करता है, वो परवाह भी करता है और ख़्याल भी रखता है... 
  • कुछ अपने होते हैं और कुछ अपने होने का 'ढोंग' करते हैं...
  • दर्द का रिश्ता सबसे ज़्यादा गहरा हुआ करता है...
  • रिश्ते उस वक़्त तक ही ज़िन्दा रहा करते हैं, जब तक उनमें अहसास की शिद्दत बाक़ी है...
  • हम जब ग़ुस्से में होते हैं, तो किसी से बात नहीं करते...वजह, कहीं हम किसी को कोई ऐसी बात न कह दें, जिससे सामने वाले को तकलीफ़ हो और बाद में हमें भी शर्मिन्दगी का अहसास हो... ग़ुस्सा उस तूफ़ान की तरह होता है, जो अपने पीछे तबाही के निशान छोड़ जाता है...
  • जो अपना होता है, वो बस अपना ही होता है... मौसम कैसे भी आएं... हालात कैसे भी हों, उसका साथ हमेशा मिलता है... ज़िन्दगी के किसी भी अच्छे-बुरे मोड़ पर वो साथ नहीं छोड़ता... हमेशा हमारे साथ रहता है, क्योंकि वो अपना होता है... हमारा अपना... हैं न...
  • जिसकी जैसी फ़ितरत होती है, वो वैसा ही बर्ताव करता है... फूलों की फ़ितरत महकना है, तो कांटों की फ़ितरत चुभन है... किसी इंसान को जानना हो, तो उसके दोस्तों को देखो...
  • घर, रिश्ते और ख़ुलूस... सब क़िस्मत की बातें हैं...
  • लफ़्ज़ों से बने रिश्ते, लफ़्ज़ों से ही टूट जाया करते हैं...
  • कुछ लोगों की क़िस्मत में सिला नहीं होता...
  • कुछ रिश्ते रूह का सुकून हुआ करते हैं और कुछ ज़िन्दगी का अज़ाब...
  • इंसान जिससे मुहब्बत करता है, उसे अपना ख़ून भी मुआफ़ कर देता है...
  • रूहानी रिश्ते बहुत गहरे हुआ करते हैं, बिल्कुल समन्दर की तरह...
  • सबसे प्यारी जगह अपना घर ही हुआ करती है... ये अलग बात है कि सबके घर नहीं होते...
  • वो मेरा होता, तो मेरे साथ होता... काश ! इतना ही कह देता-मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं...
  • कुछ ’अपने’ तकलीफ़ देते हैं... और कुछ ’अपने बनकर’ तकलीफ़ देते हैं... 
  • किसी भी रिश्ते में जब तीसरा आ जाता है, तो फिर वो रिश्ता पहले जैसा नहीं रहता... 
  • अपनापन तो बहुत जताते हैं, लेकिन हक़ीक़त में अपना वही होता है, जो आपको ख़ुशी की वजह देता है...
  • कुछ रिश्ते तभी तक अच्छे लगते हैं, जब तक उन पर झूठ और फ़रेब का मुलम्मा चढ़ा रहता है...
  • समंदर की गहराई मापी जा सकती है, लेकिन मुहब्बत की थाह पाना मुमकिन नहीं है...
  • कुछ दिन कितने भरे-भरे हुआ करते हैं... मुहब्बत से लबरेज़ दिन...
  • जो लोग दूसरों पर यक़ीन किया करते हैं, वो यक़ीनन सच्चे लोग होते हैं... क्योंकि झूठे दूसरों पर कभी यक़ीन नहीं करते...
  • किसी को दोस्त मानो तो, उसे अपनाओ भी, उस पर यक़ीन भी करो... उसे अपने परिवार के फ़र्द की तरह की मान-सम्मान दो...अगर आप यह नहीं कर सकते, तो यक़ीन जानिये आप उसे दोस्त मानते ही नहीं है...
  • अपनापन तो बहुत जताते हैं, लेकिन हक़ीक़त में अपना वही होता है, जो आपको ख़ुशी की वजह देता है...
  • लोग कहते हैं कि ख़ुश रहो, लेकिन ख़ुश रहने की वजह कोई नहीं देता... उसने हमें ख़ुश रहने की वजह दी...
  • सबसे अच्छी जगह वह हुआ करती है, जहां इंसान को अपनापन मिले...
  • किसी को विष दे दे, लेकिन उसके साथ विश्वासघात न करे... क्योंकि विष से इंसान एक बार में ही मर जाता है, लेकिन विश्वासघात का दंश उसे पल-पल डसता रहेगा...
  • महबूब की ख़ुशी से बढ़कर कोई ख़ुशी नहीं हुआ करती... महबूब की सालगिरह से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता... 
  • बेघर लोगों के पते नहीं हुआ करते...
  • अधूरी चीज़ें, अधूरे रिश्ते और अधूरी ज़िन्दगी बहुत तकलीफ़ दिया करती हैं...
  • ज़िन्दगी में ऐसा भी मुक़ाम आया करता है, जब इंसान जद्दो-जहद करके थक जाता है... उसकी ख़्वाहिशें दम तोड़ देती हैं... उम्मीद का दिया बुझ जाता है... फिर उसे ज़िन्दगी में कुछ भी अच्छा होने की ज़रा भी आस नहीं रहती...
  • दुनिया में दो रिश्ते ऐसे हैं, जिनमें ख़ुद को क़ुर्बान कर देने में ही ख़ुशी मिला करती है... पहला मां का रिश्ता... मां अपनी औलाद के लिए हर दर्द ख़ुशी-ख़ुशी सह जाती है... दूसरा रिश्ता इश्क़ का है... इंसान अपने महबूब के लिए ख़ुद को फ़ना कर देता है... ख़ुद को मिटा देने में ही उसे सुकून मिलता है...
  • जो लोग मुहब्बत करते हैं... दूसरों का भला चाहते हैं, भला करते हैं... असल में वो लोग ज़िन्दगी को भरपूर जी लेते हैं... 
  • मेरे महबूब ! तुम्हें देखा, तो जाना कि इबादत क्या है... 
  • अधूरेपन का भी अपना ही एक वजूद हुआ करता है...
  • जिस्मों की भूल-भूलैया में रूहें मुहब्बतें तलाशती हैं...
  • इंसान अपने लिए साथ तो चाहता है, लेकिन साथ देना नहीं चाहता...
  • राहे-वफ़ा में मजबूरियां होती हैं... बहुत होती हैं... लेकिन हर जगह हों, ये ज़रूरी नहीं...
  • किसी चीज़ को पा लेने से पहले ही, उसे खो देने का ख़ौफ़ बहुत तकलीफ़देह हुआ करता है... बहुत तकलीफ़देह...
  • लड़कियां अपने ख़ानदान की इज़्ज़त के लिए अपनी ख़ुशियां, अपनी मुहब्बत क़ुर्बान कर देती हैं... फिर ताउम्र छुप-छुपकर रोया करती हैं...
  • हाथ ख़ूबसूरत होने से कुछ नहीं होता, हाथों की लकीरें ख़ूबसूरत होनी चाहिए...
  • उसके आंसू अपनी आंखों में भर लेना चाहती हूं...
  • उन आंखों की उदासी हमें जीने नहीं देती...
  • कभी-कभी कहने-सुनने के लिए कुछ भी नहीं होता...अकसर ऐसा हुआ करता है... शायद सबके साथ ही ऐसा होता है... हर उस शख़्स के साथ जिसके सीने में एक दिल धड़कता है...
  • सूरज, सूरज ही रहता है... भले ही उसे कुछ वक़्त के लिए ग्रहण क्यों न लग जाए... रेत का ज़र्रा उसका मुक़ाबला नहीं कर सकता...
  • जिस दिल में मुहब्बत बस जाया करती है, फिर उस दिल में नफ़रत के लिए कोई जगह नहीं रहती... 
  • ये अल्लाह का हम पर बहुत बड़ा करम है कि उसने हमें इतनी मुहब्बत से नवाज़ा है कि दिल में किसी के लिए भी नफ़रत नहीं रही, भले ही वो हमारा दुश्मन ही क्यों न हो... इसके लिए हम अल्लाह का जितना भी शुक्र अदा करें, कम है...
  • हर्फ़ जाविदां हैं, दाइमी हैं... लेकिन तासीर सिर्फ़ हरूफ़ में ही नहीं हुआ करती, उस ज़ुबान में भी होती है, जिससे वो अदा किए जाते हैं... मसलन, एक शख़्स के चंद लफ़्ज़ बोलने पर हम उसके मुरीद हो जाया करते हैं... उसकी हर बात हमें आयत जैसी लगती है... मगर यही लफ़्ज़ जब कोई दूसरा बोलता है, तो हमें ज़हर लगते हैं...
  • कुछ दोस्तियां ऐसी भी हुआ करती हैं... किसी बात पर मन मुटाव हुआ, तो फ़ेसबुक की मित्रसूची से बाहर कर दिया, वट्सअप पर बलॊक कर दिया... मोबाइल से नंबर डिलीट कर दिया... लेकिन दिल से नहीं निकाला... क्योंकि दिल से किसी को निकालना अपने बस में नहीं हुआ करता...
  • सबसे क़रीबी दोस्त वो होता है, जिससे इंसान अपने महबूब के बारे में बात करता है, अपने ख़्वाबों के बारे में बात करता है... अपने दुख-सुख के बारे में बात करता है... बाक़ी तो रस्मी दोस्त ही हुआ करते हैं...  
  • कितनी अजीब बात है... सबसे गहरे रिश्ते किसी ग़ैर से, किसी अजनबी से ही जुड़ा करते हैं... इतने गहरे कि वो दिल में बस जाता है, रूह में समा जाता है... 
  • ग़ैर ज़िम्मेदार लोग ऐतबार के क़ाबिल नहीं हुआ करते. 
(हमारी एक कहानी से)







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